समकालीन भारतीय संवैधानिक व्यवहार में राष्ट्रपति का विवेक, मंत्रिपरिषद और लोकतांत्रिक संतुलन

Authors

  • सीता राम पंडित शोधार्थी राजनीति विज्ञान विभाग महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय, शिवनगर, पोखरा, पोड़ी गढ़वाल - 246169, उत्तराखण्ड भारत Author
  • डॉ. पी पी राणा शोध निर्देशक राजनीति विज्ञान विभाग महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय, शिवनगर, पोखरा, पोड़ी गढ़वाल - 246169, उत्तराखण्ड भारत Author

DOI:

https://doi.org/10.63345/gjirp.v1.i2.301

Keywords:

राष्ट्रपति का विवेक, अनुच्छेद 74, मंत्रिपरिषद, संवैधानिक परंपराएँ, न्यायिक समीक्षा, लोकतांत्रिक संतुलन

Abstract

भारतीय संविधान ने राष्ट्रपति को संघ की कार्यपालिका शक्ति का औपचारिक प्रमुख बनाया है (अनुच्छेद 53)। अनुच्छेद 74(1) के अनुसार वे मंत्रिपरिषद की सलाह से काम करते हैं। 42वें संशोधन (1976) ने इस सलाह को बाध्यकारी बनाया। 44वें संशोधन (1978) ने राष्ट्रपति को सलाह एक बार पुनर्विचार के लिए लौटाने का अधिकार दिया। इस व्यवस्था के बीच राष्ट्रपति के विवेक का क्षेत्र संकरा है, पर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। यह शोध-पत्र जाँचता है कि समकालीन संवैधानिक व्यवहार में राष्ट्रपति का विवेक, मंत्रिपरिषद का प्रभुत्व, संवैधानिक परंपराएँ और न्यायिक समीक्षा लोकतांत्रिक संतुलन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। अध्ययन में मिश्रित पद्धति अपनाई गई है। इसमें तीन भाग हैं: संवैधानिक प्रावधानों और प्रमुख निर्णयों का सैद्धांतिक विश्लेषण, 1950–2025 के बीच राष्ट्रपति के विवेक से जुड़े 46 प्रसंगों का विषय-वस्तु विश्लेषण, और 280 विशेषज्ञ उत्तरदाताओं का संरचित सर्वेक्षण। बहुचर प्रतिगमन विश्लेषण के अनुसार संवैधानिक परंपराओं की दृढ़ता (β = 0.34), न्यायिक समीक्षा की प्रभावशीलता (β = 0.27) और राष्ट्रपति के विवेक की वैधता (β = 0.21) लोकतांत्रिक संतुलन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। मंत्रिपरिषद का अत्यधिक प्रभुत्व (β = −0.18) इस पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। मॉडल लोकतांत्रिक संतुलन के 46% विचलन की व्याख्या करता है (R² = 0.46)। निष्कर्ष है कि राष्ट्रपति का सीमित किंतु सुविचारित विवेक, सुदृढ़ परंपराओं और न्यायिक निगरानी के साथ मिलकर, संसदीय लोकतंत्र में "नियंत्रण और संतुलन" की अंतिम सुरक्षा-रेखा का काम करता है।

Published

2025-06-09

How to Cite

समकालीन भारतीय संवैधानिक व्यवहार में राष्ट्रपति का विवेक, मंत्रिपरिषद और लोकतांत्रिक संतुलन. (2025). Global Journal of Innovative Research Perspectives (GJIRP), 1(2), Jun (1-7). https://doi.org/10.63345/gjirp.v1.i2.301

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